10:22 am - Friday March 22, 2019

राष्ट्रीय पुरस्कार के अनउपयुक्त साहित्यकार देश से क्षमा मांगें बेशर्मी से भरी पुरुस्क्र्रित कविता हेम सैंडविच पढ़ें

ham sandwichअनउपयुक्त साहित्यकार  देश से क्षमा मांगें बेशर्मी से भरी पुरुस्क्र्रित  कविता हेम सैंडविच  पढ़ें

नेहरूजी के युग से देश की सांस्कृतिक संस्थाओं पर मर्क्सिस्तों के कब्ज़े ने देश की दो पीढ़ियों की मानसिकता खराब कर दी . सांस्कृतिक अँधेरे मैं रहने वालों को देश की संस्कृति की रौशनी नहीं भा रही . ऐसे ढोंगियों को पहचान कर देश की मुख्य धारा से अलग करना चाहिए . भला हो कुछ ऐसे साहित्यकारों का जिन्होंने अपने पाखण्ड से पाए पुरस्कार लौटा दिए . साथ मैं दी हुयी पुरस्कृत किताब से उद्धृत कविता हम सैंडविच पोअध्ज कर सोचें की किस मुर्ख ने उसे पुरस्ल्कार के योग्य समझा .

(साहित्य अकादमी पुरस्कार लौटाने वाले अशोक बाजपेयी,गुरुवचन भुल्लर और नयनतारा सहगल जैसे साहित्यकारों की मानसिकता पर प्रश्न चिन्ह लगाती मेरी नयी कविता)

रचनाकार-गौरव चौहान इटावा उ प्र 9557062060 like my official page Http://m.facebook.com/kavihind

हैं साहित्य मनीषी या फिर अपने हित के आदी हैं, राजघरानो के चमचे हैं,वैचारिक उन्मादी हैं,

दिल्ली दानव सी लगती है,जन्नत लगे कराची है, जिनकी कलम तवायफ़ बनकर दरबारों में नाची है,

डेढ़ साल में जिनको लगने लगा देश दंगाई है, पहली बार देश के अंदर नफरत दी दिखलायी है,

पहली बार दिखी हैं लाशें पहली बार बवाल हुए. पहली बार मरा है मोमिन पहली बार सवाल हुए.

नेहरू से नरसिम्हा तक भारत में शांति अनूठी थी, पहली बार खुली हैं आँखे,अब तक शायद फूटी थीं,

एक नयनतारा है जिसके नैना आज उदास हुए, जिसके मामा लाल जवाहर,जिसके रुतबे ख़ास हुए,

पच्चासी में पुरस्कार मिलते ही अम्बर झूल गयी, रकम दबा सरकारी,चौरासी के दंगे भूल गयी

भुल्लर बड़े भुलक्कड़ निकले,व्यस्त रहे रंगरलियों में, मरते पंडित नज़र न आये काश्मीर की गलियों में,

अब अशोक जी शोक करे हैं,बिसहाडा के पंगो पर, आँखे इनकी नही खुली थी भागलपुर के दंगो पर,

आज दादरी की घटना पर सब के सब ही रोये हैं, जली गोधरा ट्रेन मगर तब चादर ताने सोये हैं,

छाती सारे पीट रहे हैं अखलाकों की चोटों पर, कायर बनकर मौन रहे जो दाऊद के विस्फोटों पर,

ना तो कवि,ना कथाकार,ना कोई शायर लगते हैं, मुझको ये आनंद भवन के नौकर चाकर लगते हैं,

दिनकर,प्रेमचंद,भूषण की जो चरणों की धूल नही, इनको कह दूं कलमकार,कर सकता ऐसी भूल नही,

चाटुकार,मौका परस्त हैं,कलम गहे खलनायक हैं, सरस्वती के पुत्र नही हैं,साहित्यिक नालायक हैं, —–कवि गौरव चौहान(कृपया मूल रूप में ही शेयर करें..काँटा छांटी न करें)__._,_.___

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One Response to “राष्ट्रीय पुरस्कार के अनउपयुक्त साहित्यकार देश से क्षमा मांगें बेशर्मी से भरी पुरुस्क्र्रित कविता हेम सैंडविच पढ़ें”

  1. J P Sharma
    October 21, 2015 at 9:51 am #

    अति उत्तम

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