10:25 am - Friday March 22, 2019

पाकिस्तान को कौन और क्यों वैश्विक आणविक व् मिसाइल की महाशक्ति बनाया जा रहा है . : क्या यह घोर भारत विरोधी षड्यंत्र है या भारत का सौदा हो रहा है ?

RKUपाकिस्तान को कौन और क्यों वैश्विक आणविक व् मिसाइल की महाशक्ति बनाया जा रहा है . : क्या यह घोर भारत विरोधी षड्यंत्र है या भारत का सौदा हो रहा है ?
राजीव उपाध्याय

समाचार है की पाकिस्तान शीघ्र ही ३५० परमाणु बम्ब बना कर विश्व की तीसरी आणविक महाशक्ती बन जाएगा . उधर उसे उधार की सही पर ७५०० किलोमीटर की मारक शक्ति वाला तैमुर मिसाइल बनाने की कगार पर ला खड़ा कर दिया गया है . तैमुर से पूरा यूरोप पकिस्तान की मार मैं आय…ा जाएगा .पाकिस्तान को यूरोप से क्या खतरा है ?
उधर कुडकी की हालत मैं आये प[अकिस्तान को अमरीका आइ एम् ऍफ़ की मदद से ज़िंदा रखे हुआ है . प्रश्न है की कौन पकिस्तान को एक महा शक्ति के रूप में देखना चाहता है और किसे इससे फायदा है .

वैसे तो चीन इसका स्वाभाविक उत्तर है . चीन भारत की अमरीका से बढ़ती मित्रता से परेशान है . उसे शक है की अमरीका , यूरोप , जापान व् भारत मिल कर एक रक्षा ब्लाक बना रहे हैं . इसके विपरीत चीन पकिस्तान को एक परमाणु महा शक्ति बना कर एक विकल्प खड़ा कर रहा है . उधर रूस भी पाकिस्तान को हेलिकोपतर बेच कर मित्र्ता बढ़ा रहा है . ग्वादार से रूस भी फायदा उठा सकता है .
कालांतर मैं ईरान उनके साथ मिल जाएगा .

ऐसे मैं भारत का क्या होगा कालिया ?

अमरीका किसी का मित्र नहीं हुआ और हुआ भी तो बहुत महंगी कीमत पर हुआ . वह अपने को राजा मानता है व् अन्य देशों को प्रजा .
वह भी पकिस्तान को बढ़ा रहा है जिससे भारत अमरीका की शरण मैं जाये बराबरी मैं नहीं . पश्चिम की ताकतें भारत के सैनिक चाहती हैं . वह अपने लोगों की मौत नहीं देखना चाहती .परिस्थिति वही है जैसे दक्षीण अफ्रीका की खदानों मैं भारतीय मजदूर अँगरेज़ ले गए थे . अब सैनिक चाहिए !

भारत दूसरों को युद्ध नहीं लड़ना चाहता . जा[पान का उदाहरण सबके स्समने है. पर फिर पकिस्तान व् चीन के साथ युद्ध मैं हम अकेले पड जायेंगे . इन परिस्थितियों मैं अमरीका हम पर अपनी शर्तें थोप सकता है .
इसलिए दुखद ही सही चीन की महाशक्ति बनने से हमारा रक्षा बजट बढ़ाना अत्यंत आवश्यक हो गया है .
प्रधान मंत्रि को देश की जनता को विश्वास मैं लेकर यह काम कर लेना चाहिए .
मेक इन इंडिया मैं कोई देश भारत को तकनीक नहीं देना चाहता .
इसलिए भारत को नए कूटनीतिक विकल्प खोजने होंगे .

शायद रूस पकिस्तान को वैश्विक शक्ति बनने मैं सहायक न बने . परन्तु चीन यह शीघ्र कर लेगा . ईरान भी दस साल बाद पकिस्तान की बैसाखियों पर खड़ा होकर अरब देशों का राजा बनना कहेगा .चीन नवाज शरीफ के बाद सेनाध्यक्ष राहिल शरीफ को पकिस्तान पर राज के लिए तैयार कर रहा है .सेना तो ताकत की दीवानी होती है . उसे अर्थव्यवस्था से क्या लेना देना .

दूसरी परिस्थिति मैं ख़तरा है कि पाकिस्तान को अमरीका समर्थक महाशक्ति बना कर चीन भारत को अमरीका का गुलाम बनाने का सौदा कर सकता है . यह पकिस्तान को और भायेगा .

इन परिस्थितियों मैं भारत को एक ऐसे मित्र की आवश्यकता है जो पकिस्तान व् चीन दोनों के विरुद्ध हमारे साथ हो .
जापान एक मात्र ऐसा देश है . इजराइल भी हो सकता है पर चीन से व्यापार कोई यहूदी खतरे मैं नहीं डालेगा .

कुछ भी हो भारत की राह बहुत दुरूह है . मोदी जी को नए विकल्प्
खोजने होंगे .

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