4:36 pm - Sunday February 18, 2018

बजट २०१८ – वेतन भोगी मध्यम वर्ग फिर अनाथ व् ठगा गया

बजट २०१८ – वेतन भोगी मध्यम वर्ग फिर अनाथ व् ठगा गया

                                                                                                          राजीव उपाध्याय rp_RKU-150x150.jpg

 

अंततः २०१८ का बजट और वर्तमान सरकार का अंतिम पूर्ण बजट लोक सभा मैं वित्त मंत्री ने पेश कर दिया . वेतन भोगी मध्यम वर्ग फिर ठगा सा रह गया. बजट मैं सब के लिए कुछ न कुछ था परन्तु वेतन भोई माध्यम वर्ग के लिए ४०००० रूपये का जो झुनझुना पकड़ा दिया वह तो सिर्फ दिखावे का था . एक तरफ उसे दे कर ट्रांसपोर्ट व् मेडिकल अलाऊंस दिया जाता था उसे काट दिया . तिस पर सेस को तीन से बढ़ा कर चार प्रतिशत कर दिया . कुल मिला कर टैक्स की कमी सिर्फ ७००० रूपये की आय पर होगी . यह तो न के बराबर ही है .

प्रश्न  है की यह सरकार वेतन भोगी मध्यम वर्ग के इतना खिलाफ क्यों है . पहले बजट मैं वित्त मंत्री ने आशवासन दिया था की आय बढ़ने पर वह कुछ और कटौती करेंगे . चार बजट बीतने के बाद भी वित्त मंत्री अपने आश्वासन को पूरा नहीं कर सके क्यों ?

उन्होंने खुद बजट भाषण मन कहा था की वेतन भोगी करदाता औसतन ७५००० रूपये टैक्स देता है और व्यापारी वर्ग मात्र २५००० रूपये . इसके बाद जितने भी सर्विस टैक्स इत्यादि लगे वह सब वर्गों पर समान लगे . तो वेतन भोगी वर्ग ठगा ही रह गया क्योंकि वः तो सारे अतिरिक्त कर भी देने लगा .  नौकरियां बढी नहीं ,स्कूल व्  कोलेजों की  फीसें भी बढ़ गयी . होटल रेस्टोरेंट सिनेमा सब के टिकेट बढ़ गए . बिजली, रेल यात्रा , केबल इत्यादी सब पर सर्विस टैक्स लग गया जो अब जी एस टी कहलाता है . इस वर्ग को तो दोनों तरफ से मार पड़ रही है .  सरकार का धंधे  वालों को महत्व देना एक मजबूरी भी है क्योंकि वह नौकरियां कैसे बढाए नहीं जानती .वह इस मृग मरीचिका मैं फांसी है की सिफ पैसा उधार  देने से नवयुवक फक्टारियाँ लगाने लगेंगे .ऐसा नहीं होता है . एक पढ़ा लिखा बुद्धिमान वर्ग सिर्फ नौकरी करना भी चाहता है . उसे व्यापार करना नहीं आता है .उसकी किसी को फ़िक्र नहीं है .

सरकार की इस पढ़े लिखे बुद्धिमान परन्तु साधन हीन व् नौकरी पर आश्रित वर्ग के प्रति विमुखता सिर्फ धंधे वालों को को अपनी प्रमुखता देना बुद्धि हीनता ही दिखाती है. देश की उन्नति मैं इस वर्ग का बहुत योगदान है . किसान से सस्ती दाल खरीद के जनता को महंगा बेच देने से देश का विकास नहीं होता है .देश की प्रगति मैं सॉफ्टवेर का योगदान इसी वर्ग का है .सरकार इसे देश पर भार मानती है .इसी लिए पांच वर्षों मैं इसका इतना अवमूल्यन हुआ है . अभी भी सरकार अपनी भूल सुधार कर स्टैण्डर्ड डिडक्शन की सीमा बढ़ा कर एक लाख रूपये कर सकती है .

इसका परिणाम भी दृष्टि गोचर है .सरकार के कार्यों मैं बुद्धिमत्ता का अभाव साफ़ झलकता है .जैसे नोट बंदी के बीच मैं बार बार नियम बदले और जैसे जीएसटी को बारबार बदला गया उससे स्पष्ट है की सरकार बहुत सोच समझ कर कदम उठाने के बजाय हर समय कुछ शीघ्र उपलब्धि जनता को दिखाना चाह रही है . इसी लिए देश की आर्थिक प्रगति वाजपेयी व् यूपीए – १ से कम है .

परन्तु गरीब वर्गों का बजट मैं बहुत ख्याल अवश्य रखा गया है जो की एक स्वागत योग्य कदम है . देश की उन्नति का गरीब को लाभ अवश्य मिलना चाहिए . परन्तु भ्रष्टाचार के कारण सरकारी स्कीमें सफल नहीं हो पाती जैसा की मनरेगा मैं हुआ था . नयी सरकार की स्कीमों कि नियती भी वैसी ही होंगी . बड़े उद्योगों की लगने की संभावना कम है . सरकार छोटी स्कीमों की जिस मृग मरीचिका के जाल मैं फांसी है उसके सफल होने की संभावना बहुत कम है . छोटी सिंचाई की योजनायें महाराष्ट्र मैं अजीत पवार के समय फ़ैल हो चुकी हैं . उन पर पैसा खर्चना व्यर्थ है .कौशल सम्बन्धी योजनाओं की सफलता मैं संदेह है . बाबु खा पी कर पैसा बर्बाद कर देंगे . बिना उपज बढाए किसान व् खेती से आय नहीं बढ़ेगी .इसके लिए नयी टेक्नोलॉजी की आवश्यकता है .

सब मिला के बुद्धिमान परन्तु साधन हीन लोगों काजो पिछले चार वर्षों मैं जो अवमूल्यन हुआ है देश को उसका खमियाजा भुगतना होगा .

Filed in: Articles, Economy

2 Responses to “बजट २०१८ – वेतन भोगी मध्यम वर्ग फिर अनाथ व् ठगा गया”

  1. February 2, 2018 at 10:23 am #

    BUDGET – 2018

    If I summarize my perception of the Finance Bill, it is entirely development oriented that strategically addresses all distressed sectors of the economy so as to enable them join mainstream economy of the country.
    My generous compliments to the PM / FM duo.

    Now coming to critical comments of loud-mouthed, ever-nagging Middle Class –

    Are they as distressed as farmers ?
    Are they forced to commit suicide like farmers every other day ?
    Do they believe, it is their fundamental right to claim more IT exemptions in every Budget year after year ?
    Are they the only ones who pay taxes ?
    Will they ever cease and desist demanding more and more like Muslims ?
    Why should entire attention of the Govt. always be focused on Middle Class alone ?

    For those who accuse the Budget to be LS – 2019 oriented, let me remind them, BJP is not a Bhajan-Mandali !! It is a political party and they have every right to be election oriented as election is only means available to protect the nation from traitors / dacoits coming back to power. However, Budget – 2018 is NOT LS – 2019 oriented otherwise it would have been a statement of doles, grants and subsidies.

    For the Red-Brigade gifted with convoluted / sickle shaped brains, my only advice is, they have NO business to comment after destroying Bengal / Kerala / Tripura. If they can, they should first apologise to the country for destroying these three States and the blood-bath perpetrated by them till now.

    Last but not the least, foolish comments from ‘The Educated Idiots Of India’ are welcome !!!!!

  2. February 3, 2018 at 9:37 am #

    #RashtriyaChintan
    Only / first question selfish and snobbish Middle Class, over-fed & obese with life-style diseases, asks about any Budget is, whether IT exemption limit has been raised !!
    Not that how many farmers committed suicide or soldiers died at borders.

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