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भारतीय उद्योगों के बुरे दिन कब समाप्त होंगे : July was particularly bad for manufacturing sector – rediff

भारतीय उद्योगों के बुरे दिन कब समाप्त होंगे ? : July was particularly bad for manufacturing sector – रीडिफ़

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अब तो देश के उद्योगों ने आशा भी छोड़ दी है की कभी उनके भी अच्छे दिन आयेंगे . सरकार यदि उन्हें अकेला भी छोड़ देती तो शायद वह उबर लेते पर अब तो हर खबर औद्योगिक विकास के लिए बुरी खबर ही होती है . पहले उद्योग पतियों की धर पकड़ हो रही थी क्योंकि वह घोटालों के पोषक थे . फिर मंहगाई कम करनी थी इस लिए  बैंकों के कर्जों पर रोक थी . फिर टैक्स वालों का आतंक आया और बजाय नए टैक्स वालों के पुरानों से ही टैक्स वसूली बढ़ा दी . उसके बाद नोट बंदी  आयी और अब जीएसटी .पता नहीं किसका भला हो रहा है . उद्योगों के बिना देश कैसे ताकतवर बन सकता है . क्या हम व्यापारी देश बन कर रह जायेंगे जो चीन समेत विदेशियों का माल बेचेंगे और देश को सिर्फ एजेंसियां  मिलेंगी . क्यों कोई औद्योगिक विकास के अवरुद्ध होने पर चिंतित नहीं है . आर्थिक विकास के आंकड़े झूठे हैं . आज की विकास दर मनमोहन सरकार के अंतिम वर्ष की विकास दर के बराबर ही है . न तो नयी नौकरियां हैं न ही नए उद्योग लग रहे हैं .नौ जवान जो कुछ मिले ले लो के मूड मैं आ गए हैं . इंजीनियरिंग और एम् बी ए की डिग्रियां बेकार हो गयी हैं . सरकार मुद्रा स्कीम की अफीम मैं पडी है . बांग्लादेश अपनी सफल नीतियों से भारत से दुगना कपड़ों का निर्यात कर रहा है . हम अब बांग्लादेश से भी गए गुज़रे हो गए क्या ?

खाने की चीज़ें तो मंहगी हो रही हैं जो माल बिक नहीं रहा वह ही सस्ता हो रहा है जैसे घर . जीएसटी तो नए उद्योगों को कुछ रहत देगा पुरानों का तो कोई माई बाप ही नहीं है . कोई उद्योगपति पूंजी निवेश नहीं कर रहा . सब डरे हैं इसलिए चुप हैं .सरकार की आर्थिक नीतियाँ देश के उद्योगों के लिए घातक हैं पर अब कौन चिंतित है जिसे जा कर हाले दिल सुनाएँ . चुनाव जीतना ही उद्देश्य था सो पूरा हो रहा है . पर अब तो राष्ट्रपति चुनाव भी जीत लिया , कांग्रेस को भी मृतप्राय कर दिया . उत्तर प्रदेश व् बिहार को सुरक्षित कर अगला चुनाव भी जीत सा ही लिया . सब कुछ तो मिल गया अब क्यों  मध्यम वर्ग व् उद्योगों के विकास पर ध्यान नहीं दे रहे ?

आम जनता खुश है की देश के घोटालों की अब रोज़ खबरें नहीं सुनने मैं आतीं .मोदी जी की विदेश निति व् इमानदारी बाकि सब कमियों और असफलताओं को छुपा रही है .पर सड़क व् बिजली को छोड़ कर बाकि सब विभागों मैं सन्नाटा है और कोई आशातीत उल्लेखनीय प्रगति नहीं हो रही . पर वह क्यों आर्थिक विकास पर ध्यान नहीं दे रहे व् क्यों वह झूठे आंकड़ों के मकडजाल मैं खुद भी  फंस गए हैं यह समझ नहीं आ रहा ?

सरकार मैं आर्थिक विभाग की डोर किसी समर्थ व् ज्ञानी अर्थ शास्त्री को देने की आवश्यकता जैसे मुशर्रफ ने शौकत अज़ीज़ को वित्त विभाग दे दिया था . बाबुओं के राज ने चार  साल मैं हमारे देश के उद्योगों को डुबो दिया है और चीन हम से लगातार आगे बढ़ रहा है .

July was particularly bad for manufacturing sector – rediff

 
August 01, 2017 12:04 IST

Manufacturing sector in India contracted in July following the GST launch as new orders and output dropped for the first time since the downturn in December last year post demonetisation, a survey said on Tuesday.

This contraction is going to sharpen calls for a lowering of interest rate by the RBI at its policy meet, starting Tuesday.

The Nikkei India Manufacturing Purchasing Managers’ Index (PMI) stood at 47.9 in July, down from 50.9 in June, its lowest mark since February 2009, and highlighted the first deterioration in business conditions in 2017 so far.

A figure above 50 denotes expansion while any reading below this level means contraction.

“Manufacturing growth in India came to a halt in July with the PMI down to its lowest mark in almost eight-and-a-half years amid widespread reports that the sector has been adversely affected by the implementation of the Goods and Services Tax (GST),” said Pollyanna De Lima, principal economist at IHS Markit and author of the report.

The GST launch, the survey noted, affected demand. The reductions in output, new orders and purchasing activity were all the steepest since early 2009.

“The weakening trend for demand, relatively muted cost inflationary pressures and discounted factory gate charges provide powerful tools for monetary policy easing, which has the potential to revive economic growth,” Lima said.

In the monetary policy review on June 7, the RBI left key rates unchanged, with Governor Urjit Patel noting that the central bank wanted to be more sure that inflation will stay subdued.

Discouraged by the downturn in factory orders, companies lowered production in July. The fall ended a six-month sequence of growth, and the rate of reduction was the most pronounced since the global financial crisis.

Going forward, Lima said, upcoming PMI releases will show whether underlying conditions remain on the downside or if July’s contraction was a temporary blip.

Panelists said lack of clarity regarding tax rates caused confusion among suppliers and manufacturers themselves.

The 12-month outlook for output remained positive in July, with companies expecting more clarity about GST to support growth.

However, foreign demand for India-manufactured goods improved in July as new export orders continued to rise. That said, the rate of expansion softened from June’s eight-month high, the survey stated.

Filed in: Articles, Economy

One Response to “भारतीय उद्योगों के बुरे दिन कब समाप्त होंगे : July was particularly bad for manufacturing sector – rediff”

  1. August 3, 2017 at 3:59 pm #

    Economy is booming and the author of this crap piece appears to be hiding in a dark well !!

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