10:03 am - Wednesday November 21, 2018

भारतीय डिजिटल स्पेस को सम्पूर्ण विदेशी नियंत्रण से बचाने की आवश्यकता

आज भारत की डिजिटल स्पेस पूर्णतः विदेशिओं के हाथ मैं चली गयी है . उन्होंने इसमें भारी निवेश अवश्य किया है और अगर वह ठीक लाभ वापिस ले जाएँ तो आपत्तिजनक नहीं है .परन्तु एक सीमा के बाद सारा कण्ट्रोल विदेशियों के हाथ मैं होने से देश की सार्वभौमिकता को बहुत खतरा हो आता है . हमारा सारा व्यक्तिगत डाटा , शौक , खरीदने व् नेट सर्फिंग , बैंकों की जानकारी , मनोरंजन की पसंद इत्यादि सब विदेशियों को मालूम होगी . आरटीफिशियल इंटेलिजेंस से हम को किसी भी काम के लिए प्रेरित किया जा सकता है . किसी युद्ध या विशिष्ट परिस्थिति मैं ये सेवाएँ बंद कर देश मैं अफरातफरी मचाई जा सकती है . फेसबुक ट्विटर का उपयोग अफवाहों फैलाने के लिए किया जा सकता है . इसके अलावा विज्ञापनों की भारी आय विदेश चली जाती है .

चीन ने गूगल व् फेसबुक पर प्रतिबन्ध लगा रखा है .भारत को खुले समाज से डर नहीं लगता . वह वैश्वीकरण का फायदा भी उठाना चाहता है . इस लिए खुले मैदान मैं प्रतियोगिता से उसे डर  नहीं है . परन्तु कोई भी भारतीय कंपनी बड़ी विदेशी कंपनियों का मुकाबला नहीं कर सकती . अमेज़न , उबेर , ओला , फ्लिप्कार्ट फेसबुक , गूगल , चीनी अलीबाबा से कोई भारतीय मुकाबला नहीं कर सकता जैसे कोकाकोला से कोई भारतीय कंपनी मुकाबला नहीं कर सकती . पुराने भारतीय नियमों से बंधी भारतीय कम्पनियां भारत मैं भी  इन्हें चुनौती नहीं दे सकती . इनके विदेशी कंपनियों के भारतीय अध्यक्ष हमें कुछ मानसिक सांत्वना अवश्य देते हैं . परन्तु उन्हें कभी भी बदला जा सकता है .

भारत को अपनी सुरक्षा के लिए उपाय अवश्य सोचने चाहिए .

नीचे दिए विडियो को ज्ञानवर्धन के लिए देखिये .

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