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निर्मला सीतारमण

आर्थिक मंदी : घमंडी बाबुओं व् दूकानदारों की सरकार नोट्बंदी व् जीएसटी के दुष्परिणाम क्यों नहीं समझ पा रही

आर्थिक मंदी : घमंडी बाबुओं व् दूकानदारों सरकार नोट्बंदी व् जीएसटी के  दुष्परिणाम क्यों नहीं समझ पा रही है राजीव उपाध्याय वित्त मंत्रि निर्मला सीतारमन  की स्थिति पर कभी कभी दया आती है . इतने बड़े देश की इतनी बिगड़ी अर्थव्यवस्था को सुधरने की जिम्मेवारी उन पर है और देश की जनता उनके पहले इतने दिनों से किये अदृश्य व् झूठे विकास  के दावों से बहुत नाराज है . सब तरफ नौकरियां गायब हो चुकी  हैं और सरकार है की फिर भी झूठे विकास के दावों की अफीम खा कर पडी हुयी है . बहु शिक्षित परन्तु  नोट व् वोट विहीन मध्यम वर्ग का तो इस बाबुओं व् दूकानदारों की सरकार मैं कोई खैरख्वाह है ही नहीं सो उसकी तो पिसना ही नियति है . पर अब  बड़े उद्योग पतियों माल  तो क्या पारले जी के पाँच रूपये के बिस्कुट के पैकेट भी नहीं बिक रहे . इस दीवाली पर भी बाज़ार सुनसान ही रहेंगे . इस सब पर भी वित्त व्यवस्था बिगाड़ने वाले दोषी बाबु अब भी दनदनाते घूम रहे हैं . बैंकों को मिला कर क्या तीर मार लिया ? अर्थ व्यवस्था बिगाड़ने वाले बाबुओं पर क्यों नहीं कार्यवाही होती ? सरकार से देश व् जनता की  नाराजगी  जायज है पर उसमें इस वित्त मंत्रि का कोई हाथ नहीं है . दोषी मंत्रि तो इस दुनिया मैं नहीं रहे परन्तु घमंडी व् अज्ञानी बाबु तो अब भी मुटीया रहे हैं .परन्तु नयी वित्त मंत्रि भी बजट तक  इस भयंकर मंदी  से अनभिग्य  थीं और बजट तक जोर शोर से विकास के दावे  कर रही थीं  . अचानक जब पाँच लाख बिन बिकी कारों , मोटर साइकलों व् लाखों बिना बिके घरों का बम फूटा तो सरकार को कानों मैं वास्तविकता की जूं  रेंगी . सामान्य्तः  सहनशील व् विनम्र वित्त मंत्रि भी  पूना मैं एक चार्टर्ड अकाउंटेंट के प्रश्न पर झुंझला कर  बिफर पडीं . पर उन्हें बिगडैल टीम के लीडर होने की कीमत तो चुकानी पड़ेगी. आर्थिक रूप से निकम्मी सरकार तो वही है चाहे वित्त मंत्रि नयी हों  . उनका कथन की दोषारोपण के बदले समाधान सुझाएँ सैधांतिक रूप से सही है . परन्तु कितने लोग पूरी अर्थ व्यवस्था को जानते हैं . इस लिए अधकचरे समाधानों से वित्त मंत्रि का क्या फायदा होगा . सरकारी बाबु , लोग व् मीडिया भी डर  रहे हैं . हर कोई इस सच को बोलने से कतरा रहा है कि  कभी गुजरात मैं आर्थिक प्रगति के पर्याय रहे , प्रधान मंत्रि की आर्थिक नीतियाँ व् उनका राजनितिक व् चुनावी फायदे वाले अच्छे परन्तु छोटे छोटे प्रोजेक्टों पर पूरा ध्यान केन्द्रित करना, देश को महँगा पड़  रहा है .देश की चीन सरीखी आर्थिक प्रगति के लिए जिस गहन चिंतन व् साहस की आवश्कता है वह कोई नहीं कर रहा . प्रधान मंत्रि पूरी तरह बाबुओं पर आश्रित हैं जिनमें न तो नए चिंतन के लिए विशेष ज्ञान होता है न ही साहस . वह तो फाइलों पर पुराने अनुभवों पर आधारित सरकार चलाना जानते हैं . वह प्रधान  मंत्रि को नयी दिशा नहीं बतला सकते . मनमोहन सरीखा कोई आर्थिक सलाहकार नहीं है जो देश की रूप रेखा बदल सके .प्रधान मंत्रि का व्यक्तित्व पूरे मंत्रि मंडल  व् सरकार पर इतना छाया हुआ है और कोई नयी बात नहीं कह सकता न ही नए काम करने का साहस कर सकता है . ईमानदारी के भूत ने सरकार , उद्योगों व् पूरे देश को  को सीबीआई , सीवीसी , ई डी व् इनकम  टैक्स से डरा रखा है .ऐसे मैं कौन सच कहे ? परन्तु फिर भी क्योंकि वित्त मंत्रि बार बार कह रहीं हैं हम एक बार फिर कहने का साहस कर सकते हैं . सरकार की काले धन की पूरी मुहीम आर्थिक विकास के लिए व्यर्थ है . काले धन के नुक्सान तो जगत विदित हैं पर अर्थ व्यवस्था के लिए उसके बहुत फायदे थे . काले धन के निवेश के फैसले तुरंत होते हैं . फिल्म जगत सरीखे लोग खतरे ज्यादा उठा लेते हैं .काले धन को आदमी से अधिक आसानी से विलासिता की वस्तुओं पर खर्च कर देता था . नोट बंदी के बाद जो सारा पैसा बैंकों मैं जमा हो गया वह पूरा तो अभी मिला भी नहीं है . और जिसने उसे बैंकों व् अकाउंट वालों से सफ़ेद भी करवा लिया वह अब उसे आसानी से नहीं खर्च रहा है क्योंकि सफ़ेद करवाने मैं बहुत खर्च हो गया है . चुनावों के चंदे बहुत ज्यादा थे . सरकारी बाबुओं का रिश्वत का बाज़ार तो अब भी उतना ही गर्म है . इन सब के कारण काले धन को पकड़ने की मुहीम कोई फायदा नहीं पहुंचा सकती जैसा हम नोटबंदी मैं देख चुके हैं. इस लिए नोट बंदी का बुरा असर अभी तीन चार साल और रहेगा .सरकार को अब वास्तविकता को समझ कर ही अगला कदम उठाना चाहिए . इसी तरह  बिना विकास के पुराने उद्योगपतिओं व् टैक्स दाताओं से बहुत ज्यादा टैक्स वसूलना महँगा पड़ गया क्योंकि हज़ारों अमीर लोग टैक्स आतंक से दुःखी होकर देश छोड़ कर चले गए जिससे देश को बहुत नुक्सान होगा . जीएसटी मैं भी पुराने  सेल्स टैक्स बचाने वाले बिचौलिए आ चुके हैं जो एक तिहाई या आधा जीएसटी बचने के फोर्मुले बेच रहे हैं . एक तो जीएसटी की प्रक्रिया अभी भी बहुत जटिल है और कुछ चीज़ों के रेट बहुत ज्यादा हैं . प्रक्रिया को सरल करना व् रुके पैसे को वापिस देना बहुत आवश्यक है .इसी तरह सरकार का खर्च कम दिखने के लिए बहुत बिल रोकना भी बेहद घातक  है .रुका पैसा उद्योगपतियों को तुरंत वापिस करवाया जाय. इसी  तरह चुप रहने वाले मनमोहन व् खुले दिल के वाजपेयी की सरकार मैं अफसर नए काम मैं असफलता से डरते नहीं थे . उन्हें कानूनी संरक्षण भी प्राप्त था . जितने नए सुझावों पर मोदी जी ने काम किया है वह पुरानी  सरकार के ही थे . बड़े लोग जैसे सैम पित्रोदा , नंदन नीलकेनी अपने विलक्षण सुझाव भी दे सकते थे . अब प्रधान मंत्रि के बिना कहे लोग  चुप्पी ज्यादा पसंद करते हैं .प्रधान मंत्रि की देश भक्ति व् इमानदारी सर्वविदित है पर लोग उनसे डरते हैं . सरकारी बाबुओं को लम्बे समय तक डरा कर रखने से या सत्ता के बहुत केन्द्रीयकरण से  नुक्सान ही ज्यादा होता है . मध्यम वर्ग की क्रय शक्ति बहुत घट चुकी है . इसलिए तीस साल पुराने टैक्स स्लैब्स को बदलना बहुत आवश्यक है . स्टॉक मार्किट के लाभ को इंडेक्सिंग का बेनिफिट देकर सरकार बहुत कम खर्च मैं जनता की खर्चने लायक आय बढ़ा देगी . नए निवेश की प्रक्रिया राज्यों मैं आज भी दुरूह  है और वहां बहुत ज्यादा रिश्वत मांगी जाती है . नए उद्योगों को पूर्णतः एकाकी केंद्र के संरक्षण मैं लाना बहुत लाभ दायक होगा . इसके लिए राज्यों को केंद्र शासित उद्योग पार्क लगाने के लिए कहना चाहिए . इसकी पहल बीजेपी वाले राज्यों से हो सकती है . इन क्षेत्रों मैं विदेशी पूंजी  जमीन व् लेबर व् कंपनी कानूनों को भी हटाया जा सकता है . अकसर चीन की अलोकतांत्रिक व्यवस्था को विकास के लिए लाभदायक बताया जाता है . परन्तु यदि जनता को चुनावी चंदों व् बाबुशाई से मुक्त कर दिया जाय  और जापान सरीखी मित्रता पूर्ण सरकार हो तो भारत मैं भी चीन से ज्यादा विकास दर संभव है .बंगलादेश यह कर कर दिखा चुका है अब तो हमें उससे सीखने की जरूरत है . आशा है की वित्त मंत्रि यथासंभव प्रयास करेंगी . Arrogance or decisiveness? Nirmala Sitharaman chides accountant, sparks debate Nirmala Sitharaman answer to an industry expert during a meeting over GST in Pue has sparked a debate on internet over her conduct. advertisement India Today Web Desk Pune October 12, 2019 UPDATED: October 12, 2019 00:11 IST Finance Minister Nirmala Sitharaman interacting with industry experts at BJP office in Pune (Twitter) Finance Minister Nirmala Sitharaman on Friday lashed out at a delegate at a meeting with businessmen, entrepreneurs, CAs and others in Pune. In a video shared by the news agency ANI, Nirmala Sitharaman is chiding a delegate for “being harsh on GST”. The man, representing the Cost Accountant Association from Pune, was addressing Nirmala Sitharaman over public concerns with regards to the Goods and Services Tax (GST) when the finance minister stopped him mid-sentence “to correct him”. “We know with GST you want to [increase] ease of doing business, decrease complexity of the law, reduce corruption, litigation and smooth administration; and of course the government is interested in increasing the revenue,” the speaker said, adding that sometimes the suggestions give (by the industry) are not taken as such. The delegate said he had five suggestions to give on the “real problem makers” in the GST. He also claimed that the finance minister was not likely to take the suggestions in the “right perspective” because the officers did not. It is when he said that the government was being cursed by every stakeholder that Nirmala Sitharaman interrupted him. GST cannot be dammend: Sitharaman Nirmala Sitharaman argued that the GST law was passed after long deliberation and with the cooperation of various actors. “In this country after a long time, with so many parties in the parliament, with all state governments working together, we have come up with something. Suddenly, sorry to say this, but we can’t say what a God damn structure is this,” she said. She said that the Goods and Services Tax, even if faulty, cannot be damned as it has been passed by Parliament and in all state assemblies. “It might have flaws, it might probably give you difficulties but I am sorry, it’s the ‘kanoon’ of the country now,” the finance minister said while interacting with businessmen, entrepreneurs, CAs and others in Pune. The finance minister said that rather than complaining, the various stakeholders in the GST structure must come up with solutions to increase compliance, “It’s been only two years. I wish it met with your expectations from Day 1. But I am sorry it is not so. But you all are a party to it, let’s own it up. On GST, I want all of us to give solutions for better compliance.” In a second video shared by the ANI, Nirmala Sitharaman asked the Cost Accountant Association representative to come and meet her in New Delhi on October 23 with a delegation. Arrogance or decisiveness? Nirmala Sitharaman’s conduct at the meeting immediately came under opposition scanner as Karnataka Congress leader Srivatsa YB slammed her for being ” arrogant & condescending”. “Even after more than two years, you haven’t been able to fix GST. Collections of GST are at an19 month low! And you reply arrogantly to businessmen who are facing issues daily. Ma’am, it’s high time you take a break and join anger management classes (sic),” the Congress leader said in a series of tweets. Hitting back at the Congress, newly-elected Bengaluru South MP Tejasvi Surya said that it was firmness and decisiveness of the finance minister and not arrogance. “I have met Smt @nsitharaman on multiple occasions & even argued when I haven’t been in agreement with her position. She has always been extremely polite, listened intently & explained her PoV. Let’s learn to respectfully disagree,” the BJP MP said in a tweet. Shortly after the video was shared by the news agency ANI, Twitter exploded with posts backing or slamming the finance minister. Nirmala Sitharaman clarifies To clarify her stand, Nirmala Sitharaman’s office tweeted: “Few important things to note here: 1) Smt @nsitharaman asks the man to meet her with his delegation and put forward his suggestions regarding improving the GST framework. She also promises to do all she can to hear everyone’s views. “2) The man asking the question himself says later that it was the perception regarding GST among some people which was causing issues and not GST per se.” Her official handle also claimed that the agency has not shared the full video where the minister is seen hearing all his suggestions. “@ANI has not shown where I have heard all his suggestions & there & then also gave him 23 Oct 19 for him & his delegation to meet me, as desired. #GST is no curse even if he has said so 3 times. Work is on, in response to suggestions being received as & when, to fine tune it,” another post said.     ...
राफेल पूजा

राफेल शस्त्र पूजा : लिब्रान्डूओं को मिर्ची लगी तो मैं क्या करूँ ?

राफेल शस्त्र पूजा : लिब्रंडूओं को मिर्ची लगी तो मैं क्या करूँ ? राजीव उपाध्याय इतिहास मैं हम अनेकों बार पढ़ कर और पढ़ा कर थक चुके हैं की सोमनाथ पर आक्रमण के समय पचास हज़ार लोग प्रांगण  मैं इक्कट्ठे थे और दैविक चमत्कार का प्रतीक्षा  कर रहे थे . कोई चमत्कार नहीं हुआ और सब के सब मौत के घाट  उतार दिए गए ! तुलसी दास जी ने तो राम चरित मानस मैं लक्ष्मण  का समुद्र  पूजन के समय का यह सम्वाद् भी  अमर कर दिया , ‘ नाथ दैव का कवन भरोसा ‘ . ऐसे में राफेल जैसे वैज्ञानिक व् तकनीकी श्रेष्टतः  वाले लड़ाकू हवाई जहाज की नीबुओं  से रक्षा कैसे हो सकती है ? क्या इस परम वैज्ञानिक युग मैं भारत के रक्षा मंत्रि की जहाज की रक्षा की याचना के लिए यह पूजा उचित है ? यदि यह प्रश्न यदि देश के प्रबुद्ध वैज्ञानिकों ने किया होता तो शायद सोमनाथ की घटना भी मन में कोंधती और शायद कुछ लोग यह कहते की विदेशी तकनीकी अस्त्रों की चीन के जे -२० हवाई जहाज जैसी नक़ल करना, पूजा करने से अधिक अच्छा है . देश मैं वैचारिक स्वत्न्र्ता है और हर विचारधारा के सह अस्तित्व का स्थान है . परन्तु प्रश्न तो वह लोग कर रहे हैं जिन्होंने पुराने त्रि भाषी फ़ॉर्मूले में संस्कृत की जगह जर्मन भाषा पढ़ाना शुरू कर दिया था और शंकराचार्य को दीवाली के दिन गिरफ्तार करवाया था . तो इन से कोई पूछे की क्या क्रिकेट में  जीत पर शम्पैन की बोतल खोलना उचित था ? पर क्या इन लिब्रान्दुओं  मैं से कोई बोला ? चित्र मैं भारतीय टीम का व्यव्हार  साफ़ दीख रहा है .यही हाल बहु प्रचलित केक काटने के औचित्य  का है .      चलिए राफेल शस्त्र पूजा की  विदेशी शस्त्र पूजा से ही तुलना करते हैं . संलग्न चित्र मैं विदेशों मैं नये  जहाज़ों की पूजा को देखें .लगभग भारतीय पूजा समान ही है . तो यह अवार्ड वापिसी वाले कहाँ थे . अच्छा इनको भी छोड़ें आधुनिक युग प्रगति के पर्याय अमरीकी नासा मैं अन्तरिक्ष मिशन से पहले संलग्न फिल्म में इसाई पादरी को पूजा करते देखें . अन्तरिक्ष यात्रियों में भारतीय मूल की सुनीता विलियम भी हैं . इन सबसे दुखद कहानी उन छद्म धर्मनिरपेक्ष वादियों की हैं जिन के अनुसार यदि पूजा हो तो भारत की सब धर्म विधाओं से हो ! वह भूल जाते हैं की इसी फ्रांस ने २०१५ में  ईरान के राष्ट्रपति के सम्मान में आयोजित भोज रद्द कर दिया था क्योंकि ईरान के राष्ट्रपति रोहानी ने शराब परोसे जाने वाले भोज मैं आने से मना कर दिया और फ्रांस ने अपनी परम्पराओं को दुहाई दे कर बिना शराब के भोज देने से मना कर दिया . हिन्दू बाहुल्य भारत मैं सब धर्मों का आदर अवश्य है पर  हम किसी अन्य के लिए अपनी हिन्दू रीति रिवाज़ व् परम्परा नहीं छोड़ेंगे .सत्तर वर्षों में हम सब हिन्दू से धर्म निरपेक्ष बन गए ? परन्तु अंध विश्वास व् पूजा में क्या अंतर है ? कब पूजा अवैज्ञानिक हो कर अंध विश्वास बन जाती है ? कब पूजा पर आश्रय व्यक्ति के साहस का का क्षय करता है  ? तुलसीदास जी ने लक्ष्मण के संवाद में इसी का विस्तार किया ही कह लंकेस सुनहु रघुनायक। कोटि सिंधु सोषक तव सायक॥ जद्यपि तदपि नीति असि गाई। बिनय करिअ सागर सन जाई॥4॥ सखा कही तुम्ह नीति उपाई। करिअ दैव जौं होइ सहाई। मंत्र न यह लछिमन मन भावा। राम बचन सुनि अति दुख पावा॥1॥ नाथ दैव कर कवन भरोसा। सोषिअ सिंधु करिअ मन रोसा॥ कादर मन कहुँ एक अधारा। दैव दैव आलसी पुकारा॥2॥ सुनत बिहसि बोले रघुबीरा। ऐसेहिं करब धरहु मन धीरा॥ अस कहि प्रभु अनुजहि समुझाई। सिंधु समीप गए रघुराई॥3॥ भगवान् राम ने समुद्र  को एक बाण से सोखने की क्षमता होते हुए भी तीन दिन समुद्र को मनाने के लिए पूजा की थी . शक्ति के साथ विनम्रता , अहिंसा ही हमारी परम्परा है वह शक्ति का पर्याय नहीं है . राम धारी सिंह दिनकर की कविता तो और सटीक है . क्षमा शोभती उस भुजंग को जिसके पास गरल हो उसको क्या जो दंतहीन विषरहित, विनीत, सरल हो। इसलिए रक्षा मंत्रि राजनाथ सिंह की शस्त्र  पूजा कमजोर व् असहाय की अन्धविश्वासी पूजा नहीं थी बल्कि एक सशक्त राष्ट्र  के प्रतिनिधि का विदेश में भी अपने देश की परम्पराओं का सम्मान था . पर इससे लिब्रान्डूओं को मिर्ची लगी तो मैं क्या करूँ http://patriotsforum.org/wp-content/uploads/2019/10/rafel-pooja.mp4     ...
राम रावण

ऐसे हुआ रावण का जन्म… जरूर पढ़ें यह कथा – वेबदुनिया

ऐसे हुआ रावण का जन्म… जरूर पढ़ें यह कथा   लोग लंकापति रावण को अनीति, अनाचार, दंभ, काम, क्रोध, लोभ, अधर्म और बुराई का प्रतीक मानते हैं और उससे घृणा करते हैं। लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यहां यह है कि दशानन रावण में कितना ही राक्षसत्व क्यों न हो उसके गुणों की अनदेखी नहीं की जा सकती। रावण में अवगुण की अपेक्षा गुण अधिक थे। रावण एक प्रकांड विद्वान था। वेद-शास्त्रों पर उसकी अच्छी पकड़ थी और वह भगवान भोलेशंकर का अनन्य भक्त था। उसे तंत्र, मंत्र, सिद्धियों तथा कई गूढ़ विद्याओं का ज्ञान था। ज्योतिष विद्या में भी उसे महारथ हासिल थी। कैसे हुआ रावण का जन्म- रावण के उदय के विषय में भिन्न-भिन्न ग्रंथों में भिन्न-भिन्न प्रकार के उल्लेख मिलते हैं। वाल्मीकि द्वारा लिखित रामायण महाकाव्य,पद्मपुराण तथा श्रीमद्‍भागवत पुराण के अनुसार हिरण्याक्ष एवं हिरण्यकशिपु दूसरे जन्म में रावण और कुंभकर्ण के रूप में पैदा हुए। वाल्मीकि रामायण के अनुसार रावण पुलस्त्य मुनि का पोता था अर्थात् उनके पुत्र विश्वश्रवा का पुत्र था। विश्वश्रवा की वरवर्णिनी और कैकसी नामक दो पत्नियां थी। वरवर्णिनी के कुबेर को जन्म देने पर सौतिया डाह वश कैकसी ने अशुभ समय में गर्भ धारण किया। इसी कारण से उसके गर्भ से रावण तथा कुंभकर्ण जैसे क्रूर स्वभाव वाले भयंकर राक्षस उत्पन्न हुए। तुलसीदास जी के रामचरितमानस में रावण का जन्म शाप के कारण हुआ है। वे नारद एवं प्रतापभानु की कथाओं को रावण के जन्म का कारण बताते हैं। पौराणिक कथा- इसके अनुसार भगवान विष्णु के दर्शन हेतु सनक, सनंदन आदि ऋषि बैकुंठ पधारे परंतु भगवान विष्णु के द्वारपाल जय और विजय ने उन्हें प्रवेश देने से इंकार कर दिया। ऋषिगण अप्रसन्न हो गए और क्रोध में आकर जय-विजय को शाप दे दिया कि तुम राक्षस हो जाओ। जय-विजय ने प्रार्थना की व अपराध के लिए क्षमा मांगी। भगवान विष्णु ने भी ऋषियों से क्षमा करने को कहा। तब ऋषियों ने अपने शाप की तीव्रता कम की और कहा कि तीन जन्मों तक तो तुम्हें राक्षस योनि में रहना पड़ेगा और उसके बाद तुम पुनः इस पद पर प्रतिष्ठित हो सकोगे। इसके साथ एक और शर्त थी कि भगवान विष्णु या उनके किसी अवतारी स्वरूप के हाथों तुम्हारा मरना अनिवार्य होगा। यह शाप राक्षसराज, लंकापति, दशानन रावण के जन्म की आदि गाथा है। भगवान विष्णु के ये द्वारपाल पहले जन्म में हिरण्याक्ष व हिरण्यकशिपु राक्षसों के रूप में जन्मे। हिरण्याक्ष राक्षस बहुत शक्तिशाली था और उसने पृथ्वी को उठाकर पाताललोक में पहुंचा दिया था। पृथ्वी की पवित्रता बहाल करने के लिए भगवान विष्णु को वराह अवतार धारण करना पड़ा था। फिर विष्णु ने हिरण्याक्ष का वधकर पृथ्वी को मुक्त कराया था। हिरण्यकशिपु भी ताकतवर राक्षस था और उसने वरदान प्राप्तकर अत्याचार करना प्रारंभ कर दिया था। भगवान विष्णु द्वारा अपने भाई हिरण्याक्ष का वध करने की वजह से हिरण्यकशिपु विष्णु विरोधी था और अपने विष्णुभक्त पुत्र प्रह्लाद को मरवाने के लिए भी उसने कोई कसर नहीं छोड़ी थी। फिर भगवान विष्णु ने नृसिंह अवतार धारण कर हिरण्यकशिपु का वध किया था। त्रेतायुग में ये दोनों भाई रावण और कुंभकर्ण के रूप में पैदा हुए और तीसरे जन्म में द्वापर युग में जब भगवान विष्णु ने श्रीकृष्ण के रूप में जन्म लिया, तब ये दोनों शिशुपाल व दंतवक्त्र नाम के अनाचारी के रूप में पैदा हुए थे। क्यों पड़ा रावण का दशानन नाम- रावण को दशानन कहते हैं। उसका नाम दशानन उसके दशग्रीव नाम पर पड़ा। कहते हैं कि महातपस्वी रावण ने भगवान शंकर को एक-एक कर अपने दस सिर अर्जित किए थे। उस कठोर तपस्या के बल पर ही उसे दस सिर प्राप्त हुए, जिन्हें लंका युद्ध में भगवान राम ने अपने बाणों से एक-एक कर काटा था। यदि रावण ने कठोर तपस्या से अर्जित अपने उन दस सिरों की बुद्धि का सार्थक और सही इस्तेमाल किया होता,तो शायद इतिहास में अपनी प्रकांड विद्वता के लिए अमर हो जाता और लोग उससे घृणा नहीं करते, बल्कि उसकी पूजा करते। रावण की मौत का असली पौराणिक कारण, पढ़ें कथा बहुत लोगों को यह पता होगा कि सिर्फ सीता के अपहरण के कारण ही राम के हाथों रावण की मृत्यु हुई थी। लेकिन इसके पीछे पौराणिक कारण कुछ और भी है, आइए जानते हैं…. यह उस समय की बात है जब भगवान शिव से वरदान और शक्तिशाली खड्ग पाने के बाद अहंकारी रावण और भी अधिक अहंकार से भर गया था। वह पृथ्वी से भ्रमण करता हुआ हिमालय के घने जंगलों में जा पहुंचा। वहां उसने एक रूपवती कन्या को तपस्या में लीन देखा। कन्या के रूप रंग के आगे रावण का राक्षसी रूप जाग उठा और उसने उस कन्या की तपस्या भंग करते हुए उसका परिचय जानना चाहा। कामवासना से भरे रावण के अचंभित करने वाले प्रश्नों को सुनकर उस कन्या ने अपना परिचय देते हुए रावण से कहा कि हे राक्षस राज मेरा नाम वेदवती है। मैं परम तेजस्वी महर्षि कुशध्वज की पुत्री हूं। मेरे वयस्क होने पर देवता, गंधर्व, यक्ष, राक्षस, नाग सभी मुझसे विवाह करना चाहते थे, लेकिन मेरे पिता की इच्छा थी कि समस्त देवताओं के स्वामी श्री विष्णु ही मेरे पति बनें। मेरे पिता की उस इच्छा से क्रुद्ध होकर शंभु नामक दैत्य ने सोते समय मेरे पिता की हत्या कर दी,और मेरी माता ने भी पिता के वियोग में उनकी जलती चिता में कूदकर अपनी जान दे दी। इसी वजह से यहां मैं अपने पिता की इच्छा को पूरा करने के लिए इस तपस्या को कर रही हूं। इतना कहने के बाद उस सुंदरी ने रावण को यह भी कह दिया कि मैं अपने तप के बल पर आपकी गलत इच्छा को जान गई हूं। इतना सुनते ही रावण क्रोध से भर गया और अपने दोनों हाथों से उस कन्या के बाल पकड़कर उसे अपनी ओर खींचने लगा। इससे क्रोधित होकर अपने अपमान की पीड़ा की वजह से उस कन्या ने दशानन को यह श्राप देते हुए अग्नि में समा गई कि मैं तुम्हारे वध के लिए फिर से किसी धर्मात्मा पुरुष की पुत्री के रूप में जन्म लूंगी। महान ग्रंथों में शामिल दुर्लभ ‘रावण संहिता’ में उल्लेख मिलता है कि दूसरे जन्म में वही तपस्वी कन्या एक सुंदर कमल से उत्पन्न हुई और जिसकी संपूर्ण काया कमल के समान थी। इस जन्म में भी रावण ने फिर से उस कन्या को अपने बल के दम पर प्राप्त करना चाहा और उस कन्या को लेकर वह अपने महल में जा पहुंचा। जहां ज्योतिषियों ने उस कन्या को देखकर रावण को यह कहा कि यदि यह कन्या इस महल में रही तो अवश्य ही आपकी मौत का कारण बनेगी। यह सुनकर रावण ने उसे समुद्र में फेंकवा दिया। तब वह कन्या पृथ्वी पर पहुंचकर राजा जनक के हल जोते जाने पर उनकी पुत्री बनकर फिर से प्रकट हुई। शास्त्रों के अनुसार कन्या का यही रूप सीता बनकर रामायण में रावण के वध का कारण बनी। ...
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bangladeshi attackers

157th P.F. Weekly Newsletter

157th P.F. Weekly Newsletter Dear Enlightened Readers, Jai Hind! The week reviewed has been full of violent terror attacks, primarily by the ISIS, even on, Muslim religious event and on holy site. Suicide and suicide has been the modus operandi. · UK will get first Prime Minister after Margaret Thatcher; · ISIS butchered 20 foreign hostages out of 60 taken in Bangladesh on the Eid day. Those who could recite Quran were spared. Dhaka says it was the handiwork of Pak ISI; · ISIS hacked to death a Budhhist priest in Bangladesh; · Blast on largest Eid prayer gathering killed 4 in Bangladesh. ISIS had earlier claimed they would increase their activities there; · Mob burnt mosques in Myanmar; · 4 killed in suicide bomb blast at Prophet’s Medina mosque in Saudi Arabia. It sent shock waves in the Muslim world; · ISIS gives ads in Whats App for selling 12 year old virgins for sex slaves; · The six day long Hindu festival of Rath Yatra began on July 6; · Ramjan fast for Muslims will ended. July 9, the day of Eid; · July 4 marks the American Independence day. ​(Please see inside for details.) Thanking you & with regards, Yours sincerely, D.C. Nath ...
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Weekly Newsletter – 156

Newsletter 27th June – 3rd July ’16 The week reviewed has been positively bad. • ISIS for the first time resorted to bombing. They killed 41 at Istanbul airport; • Dhaka cafe in diplomatic enclave is stormed by 9 gunmen.60 hostages have been taken; • ISIS hacked to death another Hindu priest in Bangladesh; • Pak L-e-T killed 8 in an attack on CRPF bus on Srinagar border; • North Wajiristan is Pak ISI’s terror factory to target India; • India becomes MTCR member; • No second Referendum, tells the British PM; • Israel and Turkey resumed ties after 6 years; • Many countries do not want English as an EU language; • Japan ordered surveillance against Muslim; • Alvin Toffler of “Future Shocks” is no more; • Messi gives up international football career; (Please see inside for details.) Yours sincerely, D.C. Nath +919811995693 ...
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152 th News Letter 30 th May to 5 th June ’16

Never doubt that a small group of thoughtful, committed citizens can change the world.  Indeed, it’s the only thing that ever has!                                                                                                                                                                                  1 Dear Enlightened Patriots, Jai Hind! The week reviewed has been an average week.  US wants Pakistan to understand that India’s proposed entry Into NSG is for peaceful use of nuclear energy;  Pak ISI is in league with the ISIS;  Pak turns to China over Us drone strikes;  China strengthens defence ties with Bangladesh;  ISIS suffers a big blow;  ISIS are again declared the richest terror group;  ISIS linked with Islam, so said the BBC religion chief  World’s longest, deepest rail  tunnel opened in Switzerland;  The incumbent PM in Nepal refuses to quit creating confusion among coalition partners;  MLAs in Assam took multilingual oath. Some took oath in Sanskrit; Thanking you & with regards, Yours sincerely, D.C. Nath +919811995693 (On behalf of the Patriots’ Forum)  Note: Those who do not want to receive this mail may please let us know). Indian Entry In NSG Is Not For Arms Race. This Is For Peaceful Use Of Nuclear Energy, So Advises, US State Department Wants Pak To Understand That. (PTI, All Press, May 29, 2016)   N-Armed Pak Can Reach Delhi, Said The Father of  Pak Nuke Maker, AQ Khan: India Retorted They Can Then Obliterate Pakistan. (PTI, All Press, May 30, 2016) Iraqi Army Storms ISIS Stronghold Falluja. 20 Killed. (Agencies, All Press, May 31, 2016) Indian Businessmen London Want UK To Stay In EU. (All Press, June 2, 2016) Confusion Prevails in Nepal over the incumbent Prime Minister Refusing to Quit. (All Press, June 4, 2016) Pak ISI to Back ISIS In Matters of Pak-Afghan Relation. (The Hindustan Times, May 30, 2016) ISIS Attacked Syrian Rebels And Govt Troops: 6000 people fled. (AFP, Asian Age, May 30, 2016) Taliban Killed 9 Passengers and rescued 20 Others. (Reuters, All Press, June 1, 2016)  Taliban killed 6 people In Afghan Court. (Reuters, All Press, June 2, 2016) ISIS Again Declared The Richest Terror out-fit. They Made 2.4 billion US Dollar In 2015. (PTI, All Press, June 3, 2016) 3 BSF Men Killed In Kashmir By Militants. (PTI, All Press, June 4, 2016) www.patriotsforum.org Vol.152 – Patriots Speak:: 30th May – 5th June 2016 Never doubt that a small group of thoughtful, committed citizens can change the world.  Indeed, it’s the only thing that ever has!                                                                                                                                                                                  2 Taliban In Afghanistan Gains Ground With New Tactics. (AP, The Pioneer, June 4, 2016) China Boosts Defence Ties With Bangladesh. (PTI, The Statesman, May 30, 2016)  Afghan-India Ties “Extraordinary”, But Kabul Backs China-Pak corridor. (The Hindustan Times, June 1, 2016)  Pak Hikes Defence Budget By 10 percent. (The Asian Age, June 1, 2016)  Pak Hikes Defence Budget by 10.2 percent. (The Hindustan Times, June 4, 2016) Indian GDP by 7. 6 percent according to NSO. (All Press, June 1, 2016) Indus Valley Civilisation Is Proved Older than Known So Far, so finds out the Indian Archaeological Society. (The Indian Express Editorial, June 2, 2016) 50000 Muslims Signs Petition for Triple Talaq Ban. 92 percent were in Favour of this. A Mullah has taken this to the Court. (Times Of India, June 1, 2016)  World’s Longest, deepest railway Tunnel Opened in Switzerland. (Agencies, All Press, June 2, 2016)  MLAs In Assam Legislature Take Multilingual Oath Including In Sanskrit. (Agencies, All Press, 2 June, 2016)  France Has Shut Down 160 Mosques. (Internet)  BBC Religion Chief Links ISIS with Islam. (PTI, All Press, June 3, 2016) Nuclear Suppliers Group Need for Enlightened Consensus on India: Rahul Bhonsle In the ultimate analysis members of the NSG must reach an enlightened consensus to bring 1.25 billion people many of whom are aspiring for a better future into the ambit of, “participation,” as a member of the exalted group. Geo politics over NPT and emerging power equations cannot be allowed to keep this vast band of humanity out of the nuclear supplies and technology loop despite having a flawless nonproliferation record. Even when we take care to send our newsletters to only those who are interested in receiving them, we apologise for disturbing ...
 

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