9:07 pm - Friday June 5, 2020

अत्यधिक कड़ा लॉक आउट अब नोट बंदी की तरह निरुद्देश्य , दिशाहीन व् हानिकारक बन गया है : छोटे रेड जोन बना कर देश को चालू करें और जनता को अपने को बचाने की जिम्मेवारी दें

अत्यधिक कड़ा लॉक आउट अब नोट बंदी की तरह निरुदेश्य , दिशाहीन व् हानिकारक बन गया है : छोटे छोटे रेड जोन बना कर देश को अब चालू करें और  जनता को अपने को बचाने की जिम्मेवारी दें

राजीव उपाध्यायrp_RKU-263x300.jpg

प्रारम्भ मैं जब प्रधान मंत्रि जी ने लॉक डाउन लगाया तो वह सामायिक व् आवश्यक कदम था . हमारे पास इलाज़ व् टेस्टिंग की सुविधाएं नहीं थीं . बीमारी नयी थी और इसके बारे मैं बहुत कम जानकारी थी . इटली व् चीन से भयकर ख़बरें आ रहीं थीं. ऐसी हालत मैं समस्त देश मैं अप्रत्याशित लॉक डाउन कर एक उचित फैसला लिया जिससे देश को  बीमारी के फैलाव व् जान बचाने मैं  बहुत मदद मिली. इस दो महीने के लॉक डाउन से बीमारी भारत मैं विकराल रूप नहीं ले पायी . परन्तु अब पाकिस्तान , श्री लंका  , बंगलादेश व् इंडोनेसिया को देख कर यह पता लग गया है की अब पता लग गया  संभवतः बीसीजी के टीके के चलते इन देशों इन  बीमारी इतनी घातक नहीं बनी जितनी ठंडे देशों विशेषतः अमरीका , इटली इंग्लैंड व् स्पेन मैं हो गयी . परन्तु आज तक बीमारी का कोई सफल इलाज़ नहीं निकला है . बहुत देश वैक्सीन बनाने का दावा कर रहे हैं जिनमें सिर्फ इजराइल की वैक्सीन मैं इलाज़ बनने  की संभावना है . इसलिए तुक्के वाली दवाओं से , जिस में  भारतीय मलेरिया की दवा भी शामिल है , इलाज़ किया जा रहा है . मौत उन बूढ़े  लोगों की ज्यादा हो रही हैं जिन्हें और भी बीमारियाँ हैं .

परन्तु अब हमारा अत्यधिक कड़ा लॉक डाउन एक जरूरत नहीं बल्कि सरकारी डर व् किंकर्तव्य  विमूढ़ता का प्रतीक बन गया है . इतना कडा लॉक डाउन अब देश के लिए हानिकारक हो गया है. देश मैं अब पर्याप्त दवाएं व् अन्य सुविधाएं उपलब्ध हैं . कोई भी वैक्सीन से इलाज़ नहीं सिर्फ बीमारी की रोक थाम ही होगी  . लॉक डाउन से बीमारी को बेहद फैलने से रोकने मैं मदद तो मिल सकती है पर अब रोज़ अस्सी हज़ार टेस्ट करने से  नए केस बढ़ रहे हैं . यह तो अगले तीन महीने चलेगा . लॉक डाउन के बावजूद भी अगर रोगियों की संख्या दुगनी होने मैं पंद्रह दिन भी हो गए तो जुलाई  के अंत तक चार लाख से ज्यादा बीमार हो जायेंगे .

इस लिए लॉक डाउन से  देश की सरकार व् नेत्रित्व सदा बीमारी व् मौत की दहशत मैं ही रहेगा ? जैसे जैसे बीमारों व मृतकों की संख्या बढ़ेगी वैसे वैसे वोटों पर आश्रित सरकारें  और डरेगी . यह डर लॉक डाउन को कभी भी समाप्त नहीं करने देगा और जैसे जैसे समय बीतेगा लॉक डाउन उठाना उतना कठिन होता जाएगा .

दूसरी भारत के विश्व भर मैं सबसे कड़े लॉक डाउन से भारतीय अर्थ व्यवस्था पूरी तरह  चरमरा गयी है . उद्योग व् दूकानदार क़र्ज़ मैं डूब गए हैं . करोड़ों मजदूर बेरोजगार हो गए हैं और  व्यापक भूखमरी अब बस दस्तक देनेवाली है .रेल बस व् हवाई जहाज को छोड़ें अभी तो देश के बड़े शहरों  मैं रिक्शा चलाना भी संभव नहीं है.

अब एक बार फिर समय एक साहसिक फैसला लेने का आ गया है . सरकार को लॉक डाउन के बजाय इलाज़ की सुविधाएं हर तहसील मैं देने पर करना चाहिए . हर तहसील मैं इलाज़ व् आइसोलेशन की सुविधा दे कर प्राइवेट डॉक्टरों को इसका इलाज़ करने देना चाहिए . उद्योग व् दुकानें पूरी तरह खोल दें . सिर्फ स्कूल, कॉलेज ,मॉल , सिनेमा घर जैसी भीड़ भाड़  वाली संस्थाओं पर प्रतिबन्ध लगाया जाय .फक्ट्रियों को आवश्यक सुविधाएं देने का निर्देश दे कर खुलने दिया जाय .

जनता अब सब सावधानियों को जान गयी है . उसे मास्क व् दस्ताने पहन कर लोगों मैं दूरी बना कर अपनी रक्षा खुद करने की जिम्मेवारी देनी चाहिए .हर घर मैं कोरोना के मरीज को रखने के लिए आवश्यक रक्षात्मक सामग्री व् तकनीक बताई जाय. आखिर देश मैं आय बीमारियों को घर पर ही इलाज़ से ठीक किया जाता है. खांसी बुखार होने पर घर से निकलने पर कडा प्रतिबन्ध लगा दिया जाय.

पूरे जिले को रेड जोन बनाना तर्क हीन  है .बड़े शहरों मैं रेड जोन सिर्फ सौ गज का होना चाहिए . हर प्रभावित घर पर लाल झंडा लगा देना चाहिए . उस गली को रेड जोन बना देना चाहिए .वहां लाल झंडे लगा कर सबको सचेत कर देना चाहिए.

भारतीय जनता पर विश्वास कर देश की अर्थ व्यवस्था को अब सुचारू बनाने पर भी ध्यान दिया जाय . इसके लिए फैसले वह सरकारी बाबू न करें जिन्हें  का कोई ज्ञान नहीं है .

अत्यधिक कडा लॉक डाउन अब नोट बंदी की तरह ही दिशाहीन , निरुद्देश्य व् हानिकारक हो गया है .

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