3:58 am - Monday July 13, 2020

क्या बाबू रक्षा में आत्मनिर्भरता को ‘ मेक इन इंडिया ‘ की तरह ध्वस्त कर देंगे : Eternal Wait For Orders For Successfully Developed Indigenous Armaments

क्या बाबू रक्षा में आत्मनिर्भरता को ‘ मेक इन इंडिया ‘ की तरह ध्वस्त कर देंगे : Eternal Wait For Oredrs For Successfully Developed Indigenous Armaments    – राजीव उपाध्याय rp_RKU-263x300.jpg

 

भारत का रक्षा सामग्री के भारत मैं उत्पादन का ‘ Make In India ‘ प्रोजेक्ट बुरी तरह से टांय टांय  फिस्स हो गया क्योंकि कोई बड़ी हथियार बनाने वाली विदेशी कंपनी भारत में फैक्ट्री लगाने के लिए तैयार नहीं हुई .ले देकर रूस की विश्व विख्यात कलाश्निकोव कम्पनी अमेठी मैं AK २०३ असाल्ट राइफल बनाने की फैक्ट्री लगाने के लिए तैयार हुई . प्रारंभिक चरण मैं सात लाख राइफल बनानी थी . फैक्ट्री अब भी आर्डर का इंतज़ार कर रही है क्योंकि राइफल का दाम तय नहीं हो रहा . इस दौरान आयतित अमरीकी राइफल आ भी गयी परन्तु भारत के सरकारी क्षेत्र मैं  अमेठी मैं बनने वाली रूसी राइफल दूर दूर तक नहीं दीख रही  क्योंकी  बाबुशाही जब फ़ाइल आईगी तो फैसला करेगी !

देश के हर स्वदेशी हथियार बनाने वाली कंपनी वर्षों से आर्डर के लिए तरस रही हैं परन्तु बाबुओं के कानों मैं जूँ  नहीं रेंगती .

हम एच ए एल के धीमी गाती से हवाई जहाज बनाने की बात जानते हैं क्योंकि वह दीखता है . एच ए एल के ८३ तेजस मार्क १ ए का आर्डर अभी तक नहीं दिया गया जबकी रक्षा मंत्रालय इसे लगभग एक साल पहले स्वीकृती दे चुका है . उसे पहले वायु सेना के कहने पर डिजाईन मैं अनेकों परिवर्तन किये गए और उनकी टेस्टिंग में  वर्षों लग गए . तेजस मार्क २ की तो बात ही न की जाय तो अच्छा है .

यही हाल ११८ अर्जुन मार्क १ ए  टैंक का है . टैंक में अनेकों परिवर्तनों के बाद उसे आधुनिकतम बना कर सेना ने पास किया परन्तु आर्डर का अभी तक वर्षों से  इन्तिज़ार ही हो रहा है .

The MBT Arjun Tanks passes through the Rajpath during the full dress rehearsal for the Republic Day Parade-2010, in New Delhi on January 23, 2010.

The MBT Arjun Tanks passes through the Rajpath during the full dress rehearsal for the Republic Day Parade-2010, in New Delhi on January 23, 2010.

NAAG MISSILEपूर्व राष्ट्र पति  कलाम के प्रिय मिसाइल प्रोजेक्ट की कड़ी के टैंक भेदी नाग मिसाइल के सारे परिक्षण समाप्त हो गए परन्तु उसके ८००० मिसाइल का आर्डर दूर दूर तक नहीं दीख रहा जो की वैज्ञानिकों के लिए अत्यंत निराशापूर्ण है .

इसी तरह एच ए एल  बहुत अच्छा एल सी एच हेलीकाप्टर बना कर सारे टेस्ट के बाद आर्डर की वर्षों से प्रतीक्षा कर रही है . आयातित अमरीकी हेलीकाप्टर तो आ गए पर एच सी एल को आर्डर नहीं मिला ! ऐसे ही रूस के कमोव हेलीकाप्टर का आर्डर अभी तक नहीं दिया गया जब की यह हमारे प्रधान मंत्रि व् रूसी राष्ट्रपति के बीच का फैसला था .

जो बाबू पंसारी की दूकान नहीं चला सकते उनको प्राइवेट सेक्टर से हथियार बनवाना कैसे आयेगा .

LCH HELICOPTERबोफोर तोपों के बाद भारत की टाटा व् कल्याणी ग्रुप की तोपें ४८ किलोमीटर गोला दाग कर विश्व रिकॉर्ड बना चुकी हैं . सेना उनसे पूरी तरह संतुष्ट है . पर तोप बनाने के लिए देश उनका आभार तो प्रकट कर सकता है पर उनको आर्डर कब मिलेगा शायद ईश्वर भी नहीं जानता .इसी तररह लारेसें टुब्रो ने परमाणु पनडुब्बी बना ली पर अगला आर्डर , पता नहीं ! बाबू यह नहीं जानते  की कोई सफल  कंपनी को तीन से चार साल की आर्डर बुक चाहिए . यदि हर आर्डर द्रौपदी का चीर बन के रह जाएगा तो हर हथियार बनाने वाली कंपनी तो दिवालिया हो जायेगी . एक उदाहरण और देखें वर्षों पहले एच ए एल ने कहा की सुखोई हवाई जहाज की निर्माण लाइन का काम समाप्त हो रहा है और ३६ हवाई जहाज बहुत सस्ते मैं बनाये जा सकते हैं  और लाइन भी चलती रहेगी . बाबुओं ने कोई फैसला नहीं किया . अब जब चीन से लड़ाई की KALYAANI GUNसंभावना देखी तो आनन फानन मैं इमरजेंसी बेसिस पर १२ सुखोई का आर्डर रूस को देने जा रहे हैं .बाबु सिर्फ दफ्तर की फ़ाइल पर अंग्रेज़ी लिखना जनता है . उसे कारखानों का कोई ज्ञान य अनुभव नहीं है . किसी गलत फैसले की उस पर जिम्मेंवारी नहीं डाली जाती और इसी गुरुर मैं वह अपनी सत्ता के घमंड मैं चूर चूर रहता है . चाहे एच ए एल या कल्याणी या टाटा बंद हो या अभिनन्दन पकड़ा जाय या बीस जवान गलवान घाटी मैं मारे जाएँ उसे रात को छोटा पेग पी कर सो जाना है और अगले दिन किसी और फाइल पर दस लम्बे  नोट लिख देने हैं जिनको पार करने मैं दो साल लग जाने हैं .

यदि इसी तरह से काम किया गया तो ‘मेक इन इंडिया’  की तरह प्रधान मंत्रि का रक्षा में आत्म निर्भरता का अभियान भी कागजों की धुल ही  चाटता  रह जाएगा .

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One Response to “क्या बाबू रक्षा में आत्मनिर्भरता को ‘ मेक इन इंडिया ‘ की तरह ध्वस्त कर देंगे : Eternal Wait For Orders For Successfully Developed Indigenous Armaments”

  1. Rajiv Kumar Upadhyay
    June 26, 2020 at 9:51 am #

    reply from a friend

    मैं ही हूँ प्रोसीजर बाबू
    नहीं किसी के आया क़ाबू
    जनता हो या हो सरकार
    न्यायपालिका या अख़बार
    चाहे जितना ज़ोर लगा लें
    क़लम चला लें या तलवार
    मेरे आगे सब लाचार

    बड़े सचिव ने फ़ाईल चलाई
    उत्तम थे उनके सुविचार
    लगने हैं उद्योग, कि खोलें
    देश में नूतन कारोबार
    नौकरियॉं फिर ख़ूब बढ़ेंगी
    देश में ख़ुशहाली फैलेगी
    रेलगाड़ी, बस और जहाज़
    उपग्रह, रॉकेट, खेत, अनाज

    पर मैंने जब नोटिंग डाली
    ऑब्जेक्शन की स्याही काली
    फ़ाईल भेज दें वित्त विभाग
    उनकी फिर अनुमति के बाद
    पर्यावरण विभाग से पूछें
    कहीं नहीं हो कोई विवाद
    फिर क़ानून विभाग का ठप्पा
    सचिवालय का चप्पा-चप्पा
    जब तक ना छानें, सरकार!
    मेरी राय यही है, सर जी!
    आगे बढ़ने में है रार

    वैसे मैं हूँ अदना बाबू
    लेकिन सिस्टम है बेक़ाबू
    आप बड़े साहब हैं मेरे
    पर पग-पग चक्कर बहुतेरे
    मैं ना चाहूँ आप फँसें, सर!
    प्रोसीजर ना भंग करें, सर!
    और कैरियर अच्छा होगा
    कहीं फँसे तो गच्चा होगा

    काम का क्या है? होता होगा
    यही देश ने अब तक भोगा
    चाहे कोई करे ना कुछ, पर
    पहनें सब सच का ही चोगा
    सर आपके तीस बरस हैं
    मंत्री जी के केवल पॉंच
    ऑर्डर सरकारी हो कुछ भी
    आप फूँककर पीवें छाछ

    मंत्री आते जाते रहते
    जनता के भी सपने बनते
    आप तो सर ख़ुद बच के चलिये
    फ़ाईल-पत्र पर कुछ मत लिखिये
    मैंने अब तक के सचिवों को
    यही ज्ञान बाँटा श्रीमान्
    बेदाग़ सब हुए रिटायर
    पेंशन पाया और सम्मान

    साहब सुन कर मेरी राय
    हुए बड़े भयभीत
    सोचे, फिर कुछ गुन कर बोले
    अगर यही है रीत
    मैं काहे को जान फँसाऊँ
    क्यों निष्ठा बेकार दिखाऊँ
    आप, बड़े बाबू! हैं मेरे
    असली तारणहार
    ऐन वक़्त पर मुझे आपने
    सही दिखाया द्वार

    बड़े बाबू, इन पत्रों को अब
    लगा ठिकाने घर चलें
    ये सारे प्रस्ताव भी फाड़ें
    कूड़ेदान के अंदर डालें
    अब क्या करना
    क्यूँकर डरना
    तनखा को तो है ही आना
    बस घर-दफ़्तर आना जाना
    काम करें या बैठे ठाले
    रूई कान में ठूँस के डालें
    मेरा क्या कोई करे बिगाड़
    मैं तो हूँ नियमों की आड़
    मेरी नौकरी मेरी जान
    कुर्सी से मेरी पहचान
    जनता जाये चूल्हे भाड़।

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