2:29 pm - Saturday September 26, 2020

क्या है वह पारिजात वृक्ष , जिसे प्रधान मंत्रि ने अयोध्या मैं लगाया है

क्या है वो पारिजात वृक्ष, जिसे प्रधान मंत्रि ने अयोध्या में लगाया है – न्यूज़ १८ से साभार

आकर्षक फूलों से युक्त पारिजात वृक्ष

अयोध्या (Ayodhya) में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) खास पारिजात का वृक्ष लगाने वाले हैं. पारिजात को हमारे शास्त्रों में पवित्र और खास वृक्ष के रूप में माना जाता है. जिसके फूल महकने वाले और औषधियुक्त होते हैं. कई तरह के रोगों से इनके जरिए इलाज हो सकता है. इसे लेकर कई मान्यताएं और कहानियां भी रही हैं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब अयोध्या में राम मंदिर भूमि पूजन में हिस्सा लेंगे, उसके बाद वो वहां एक पारिजात का वृक्ष भी लगाएंगे. हिंदू धर्म में इस वृक्ष को बहुत खास स्थान हासिल है. इसे पवित्र वृक्ष मानते हैं, जिसके फूल ईश्वर की आराधना में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं.

पारिजात को हरसिंगार भी कहा जाता है. हम सभी ने कविताओं के जरिए अक्सर इसकी तारीफ सुनी है. इसे प्राजक्ता, परिजात, हरसिंगार, शेफालिका, शेफाली, शिउली भी कहा जाता है. उर्दू में गुलज़ाफ़री कहते हैं.

पारिजात का वृक्ष बहुत सुंदर होता है. इससे सुंगध फूटती रहती है. इस पर आकर्षक व सुगन्धित फूल लगते हैं. इसके फूल, पत्ते और छाल का उपयोग कई तरह औषधियों में होता है. ये सारे देश में पैदा होता है. भारतकोश के अनुसार ये भी माना जाता है कि पारिजात के वृक्ष को छूने मात्र से ही व्यक्ति की थकान मिट जाती है.
कैसा होता है इसका वृक्ष
पारिजात का वृक्ष 10-15 फीट ऊंचा होता है. कहीं कहीं इसकी ऊँचाई पच्चीस से 30 फीट तक भी चली जाती है. खासतौर पर ये बागबगीचों की शोभा होता है. इसके फूल बहुत अच्छे लगते हैं. पारिजात पर काफी संख्या में फूल लगते हैं.

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कह सकते हैं कि ये वृक्ष फूलों से लदा होता है. ये मध्य भारत और हिमालय की नीची तराइयों में अधिक पैदा होता है. ज्योतिष विज्ञान में भी पारिजात का विशेष महत्व बताया गया है.

पारिजात के फूल आकर्षक और सुगंध वाले होते हैं. ये रात के समय वृक्षों से नीचे गिरते हैं

पुराण में इसके बारे में क्या कहा गया है
‘हरिवंशपुराण’ में एक ऐसे वृक्ष का उल्लेख मिलता है, जिसको छूने से देव नर्तकी उर्वशी की थकान मिट जाती थी. एक बार नारद मुनि इस वृक्ष से कुछ फूल इन्द्र लोक से लेकर कृष्ण के पास आये. कृष्ण ने वे फूल लेकर पास बैठी अपनी पत्नी रुक्मणी को दे दिए.

इसके बाद नारद कृष्ण की दूसरी पत्नी सत्यभामा के पास गए. उनसे ये सारी बात बतायी. सत्यभामा को नारद ने बताया कि इन्द्र लोक के दिव्य फूल कृष्ण ने रुक्मणी को दे दिए हैं. यह सुन कर सत्यभामा को क्रोध आ गया. उन्होंने कृष्ण से कहा कि उन्हें पारिजात का वृक्ष चाहिए. कृष्ण ने कहा कि वो जल्द ही इन्द्र से पारिजात का वृक्ष लाकर उन्हें देंगे.

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नारद जी अगर कृष्ण की पत्नियों के बीच झगड़ा लगाया तो इंद्र के पास जाकर ये भी कहा कि ये वृक्ष इंद्रलोक की शोभा हैं, लिहाजा उन्हें कृष्ण को नहीं दिया जाए. लेकिन तमाम विरोध के बाद भी इंद्र को पारिजात कृष्ण को देना ही पड़ा, लेकिन उन्होंने पारिजात वृक्ष को श्राप दे दिया कि इसका फूल दिन में नहीं खिलेगा.

बाराबंकी का प्रसिद्ध पारिजात का वृक्ष, जिसे किन्तूर कहा जाता है, ये बहुत पुराना बताया जाता है

एक मान्यता ये भी
एक अन्य मान्यता यह भी है कि ‘पारिजात’ नामकी एक राजकुमारी हुआ करती थी, जिसे भगवान सूर्य से प्रेम हो गया था. तमाम कोशिश के बाद भी भगवान सूर्य ने पारिजात के प्रेम को स्वीकार नहीं किया, जिससे खिन्न होकर राजकुमारी पारिजात ने आत्महत्या कर ली. जिस स्थान पर पारिजात की क़ब्र बनी, वहीं से पारिजात नामक वृक्ष ने जन्म लिया. इसी कारण पारिजात वृक्ष को रात में देखने से ऐसा लगता है, जैसे वह रो रहा हो. लेकिन सूर्य उदय के साथ ही पारिजात की टहनियां और पत्ते सूर्य को आगोश में लेने को आतुर दिखाई पडते हैं.

लक्ष्मी को इसके फूलों से खुश किया जाता है
मान्यता है कि धन की देवी लक्ष्मी को पारिजात के पुष्प प्रिय हैं. उन्हें प्रसन्न करने में भी पारिजात वृक्ष का उपयोग किया जाता है. ये तथ्य भी महत्त्वपूर्ण है कि पारिजात वृक्ष के वे ही फूल उपयोग में लाए जाते हैं, जो वृक्ष से टूटकर गिर जाते हैं. यानि वृक्ष से फूल तोड़ना पूरी तरह से निषिद्ध है.

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औषधीय गुणों का भंडार
पारिजात में औषधीय गुणों का भी भण्डार है. पारिजात बवासीर रोग के निदान के लिए रामबाण औषधि है. इसके फूल हृदय के लिए भी उत्तम औषधि माने जाते हैं. पारिजात की पत्तियों को पीस कर शहद में मिलाकर सेवन करने से सूखी खाँसी ठीक हो जाती है. इसी तरह पारिजात की पत्तियों को पीसकर त्वचा पर लगाने से त्वचा संबंधी रोग ठीक हो जाते हैं.

पारिजात की पत्तियों से बने हर्बल तेल का भी त्वचा रोगों में भरपूर इस्तेमाल किया जाता है. पारिजात की कोंपल को यदि पाँच काली मिर्च के साथ महिलाएं सेवन करें तो महिलाओं को स्त्री रोग में लाभ मिलता है. इसकी पत्तियों का जूस क्रोनिक बुखार को ठीक कर देता है

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