12:58 am - Wednesday November 22, 2017

Archive: Literature Subscribe to Literature

panchwati-nasik1

चारु चंद्र की चंचल किरणें खेल रही थीं जल थल पर / मैथिलीशरण गुप्त संग्रह: पंचवटी

चारु चंद्र की चंचल किरणें / मैथिलीशरण गुप्त संग्रह: पंचवटी चारुचंद्र की चंचल किरणें, खेल रहीं...
kabuliwala

काबुलीवाला _ टैगोर की कहानी

काबुलीवाला रवीन्द्रनाथ ठाकुर की कहानी मेरी पाँच बरस की लड़की मिनी से घड़ीभर भी बोले बिना नहीं...
Premchand

गुल्ली डंडा – प्रेम चंद की कहानी

गुल्ली-डंडा हमारे अँग्रेजी दोस्त मानें या न मानें मैं तो यही कहूँगा कि गुल्ली-डंडा सब खेलों...
indian_woman-other

नारी तुम केवल श्रद्धा हो – कामायनी ( लज्जा) : जय शंकर प्रसाद

कोमल किसलय के अंचल में नन्हीं कलिका ज्यों छिपती-सी, गोधुली के धूमिल पट में दीपक के स्वर में दिपती-सी। ...
Mkhanlal_Chaturved

कैदी और कोकिला : माखन लाल चतुर्वेदी की कविता

कैदी और कोकिला क्या गाती हो? क्यों रह-रह जाती हो? कोकिल बोलो तो ! क्या लाती हो? सन्देशा किसका है? कोकिल...
Premchand

ईदगाह – प्रेमचंद की प्रासंगिक कहानी

All those campaigning to introduce Mother’s day and Father’s Day on American pattern in India, in which sending gift with card is considered ‘ mukti’ from parental obligation may learn from this story the depth an secret...
short life cartoon

मानव जीवन की लघुता पर उर्दू शेरों के अलफ़ाज़

  मानव जीवन की लघुता पर अनेक मनीषियो ने अपने विचार व्यक्त किये हैं आज हम आपकी सेवा में कुछ उर्दू...
Duality-of-Humanity-2

मनुष्यता : मैथिलि शरण गुप्त की कविता

  मनुष्यता                   विचार लो कि मर्त्य हो न मृत्यु                   से डरो कभी, मरो परन्तु...
Nirala

भिक्षुक : सूर्य कान्त त्रिपाठी निराला की कविता

भिक्षुक / सूर्यकांत त्रिपाठी निराला वह आता– दो टूक कलेजे के करता पछताता पथ पर आता। पेट पीठ...
Jaishankar-Prasadedt

जय शंकर प्रसाद की कवितायेँ

आह ! वेदना मिली विदाई आह ! वेदना मिली विदाई मैंने भ्रमवश जीवन संचित, मधुकरियों की भीख लुटाई छलछल...