4:14 pm - Wednesday November 22, 2017

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hari om panwar

कंधार विमान अपहरण पर हरी ओम पवार की कविता

hari om panwar

kashmir ka dard – best poem of Hari Om Panwar

आओ फिर से दिया जलाएं – अटल बिहाई वाजपेयी

आओ फिर से दिया जलाएँ भरी दुपहरी में अंधियारा सूरज परछाई से हारा अंतरतम का नेह निचोड़ें- बुझी...

सोहन लाल द्विवेदी – तुम्हें नमन

चल पड़े जिधर दो डग, मग में चल पड़े कोटि पग उसी ओर ; गड़ गई जिधर भी एक दृष्टि गड़ गए कोटि दृग उसी ओर, जिसके...

किसको नमन करूँ मैं भारत?

– रामधारी सिंह दिनकर (Ramdhari Singh Dinkar) तुझको या तेरे नदीश, गिरि, वन को नमन करूँ, मैं ? मेरे प्यारे देश !...

विजयी के सदृश जियो रे – रामधारी सिंह ‘दिनकर’

वैराग्य छोड़ बाँहों की विभा संभालो चट्टानों की छाती से दूध निकालो है रुकी जहाँ भी धार शिलाएं...

कलम, आज उनकी जय बोल – रामधारी सिंह “दिनकर”

जला अस्थियां बारी-बारी चिटकाई जिनमें चिंगारी, जो चढ़ गये पुण्यवेदी पर लिए बिना गर्दन का मोल। कलम,...

हो गई है पीर पर्वत – दुष्यंत कुमार

हो गई है पीर पर्वत-सी पिघलनी चाहिए इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए आज यह दीवार, परदों की तरह...

शोरा जो पहचानिए

शोरा जो पहचानिए,जो लड़े दीन के हेत, पुर्जा-पुर्जा कट मरे,कभी ना छाडे खेत| जो धो प्रेम खेलन का चाव, सिर...

तूफानों की ओर घुमा दो नाविक – शिवमंगल सिंह ‘सुमन’

आज सिंधु ने विष उगला है लहरों का यौवन मचला है आज हृदय में और सिंधु में साथ उठा है ज्वार तूफानों...