2:08 pm - Wednesday July 26, 2017

Archive: Poems Subscribe to Poems

खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थी

खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थी – Subhadra Kumari Chauhan सिंहासन हिल उठे राजवंशों ने भृकुटी तानी...

क्योंकि सपना है अभी भी

क्योंकि सपना है अभी भी – धर्मवीर भारती (Dharamvir Bharti) …क्योंकि सपना है अभी भी इसलिए तलवार टूटी अश्व...

दिन कुछ ऐसे गुजारता है कोई

दिन कुछ ऐसे गुजारता है कोई – गुलजार दिन कुछ ऐसे गुजारता है कोई जैसे एहसान उतारता है कोई आईना...

मुझको भी तरकीब सिखा यार जुलाहे

मुझको भी तरकीब सिखा यार जुलाहे – Gulzar अकसर तुझको देखा है कि ताना बुनते जब कोइ तागा टुट गया या...

यात्रा और यात्री

यात्रा और यात्री – हरिवंश राय बच्चन (Harivansh Rai Bachchan) साँस चलती है तुझे चलना पड़ेगा ही मुसाफिर! चल रहा...

है अँधेरी रात पर दीवा जलाना कब मना है

है अँधेरी रात पर दीवा जलाना कब मना है – Harivansh Rai Bachchan कल्पना के हाथ से कमनीय जो मंदिर बना था भावना...

मकान

मकान – कैफी आजमी (Kaifi Azmi) आज की रात बहुत गरम हवा चलती है आज की रात न फुटपाथ पे नींद आयेगी । सब उठो,...

नर हो न निराश करो मन को

नर हो न निराश करो मन को कुछ काम करो कुछ काम करो जग में रहके निज नाम करो यह जन्म हुआ किस अर्थ अहो समझो...

नहुष का पतन

मत्त-सा नहुष चला बैठ ऋषियान में व्याकुल से देव चले साथ में, विमान में पिछड़े तो वाहक विशेषता से...

आर्य

हम कौन थे, क्या हो गये हैं, और क्या होंगे अभी आओ विचारें आज मिल कर, यह समस्याएं सभी भू लोक का गौरव,...